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Monday, 16 June 2014

Try these 6 tips that will solve your problems

समस्याओं से मनुष्य कभी नहीं बच सकता। किसी न किसी समस्या के फेर में पड़ा रहता है। आज का मनुष्य! गृहस्थी के चलता है। नौकरी और व्यवसाय को करता है।

रोगों से लड़ता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है। इसमें कई तरह की समस्याएं आती हैं। इस प्रकार की अनेक समस्याएं व्यक्ति के जीवन में आती-जाती रहती हैं। यकीन कीजिए आप इन सभी तरह की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

    विशाखा नक्षत्र में महुआ का बांदा लाकर गले में धारण करने से भय समाप्त हो जाता है। डरावने सपने नहीं आते।

    मघा नक्षत्र में हरसिंगार का बांदा लाकर घर में रखने से समृद्धि एवं संपन्नता में वृद्धि होती है।

    घर में रखने वाली अलमारी का मुख उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलक्ष्मी का आगमन घर में होता है।

    यदि मकान बनाते समय वास्तु यंत्र की स्थापना भूमि पूजन के साथ कर दी जाए तो मकान पर बुरी आत्माओं का साया नहीं रहता।

    जो बच्चा सोने के नाम से ही डर जाता हो, उसकी चारपाई के नीचे तवे को उल्टा करके रख दें। बच्चा आसानी से सो जाएगा।

    यदि आप पर परिवार की अधिक जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें आप धन की कमी के कारण पूरा नहीं कर पा रहें हैं तो आप महीने के पहले शुक्रवार को एक लाल कमल का फूल लाकर उस पर रोली से तिलक कर, लाल वस्त्र के ऊपर रखें और धूप-दीप दिखाकर, उसी लाल वस्त्र में लपेटकर धन रखने के स्थान पर रख दें।

Wednesday, 11 June 2014

When spider webs in the home might increase may take the trouble

वास्तु दोष के कारण कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। घर का मुख्य द्वार वास्तु दोषों से मुक्त हो, तो घर में सुख-समृद्धि रहती है। सभी तरह के मंगल कार्यों में वृद्धि होती है और परिवार के लोगों में आपसी समंजस्य बना रहता है।

वास्‍तु के अनुसार मकड़ी के जाले घर में बहुत अशुभ माने जाते हैं। अमूमन देखा जाता है घर के निचले हिस्सों की तो सफाई हो जाती है लेकिन छत या ऊपरी हिस्सों की ठीक से सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में वहां मकड़ी द्वारा जाले बना लिए जाते हैं। घर में ये जाले होना अशुभ माना जाता है।

लोग कहते हैं कि घर में मकड़ी के जाले नहीं होना चाहिए। ये अशुभ होते हैं। ये अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक कारण मौजूद हैं। मकड़ी के जालों की संरचना कुछ ऐसी होती है कि उसमें नकारात्मक ऊर्जा एकत्रित हो जाती है। इसलिए घर के आनजिस भी कोने में मकड़ी के जाले होते हैं, वह कोना या हिस्सा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इस कारण घर में कलह, बीमारियां व अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

मकड़ी के एक जाले में असंख्य सूक्ष्मजीव रहते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पंहुचाते हैं। इसलिए कहा जाता हैं कि अगर घर में मकड़ी के जाले होते हैं तो घर की सुख-समृद्धि का नाश होने लगता है क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा के कारण घर का माहौल इतना अशांत हो जाता है कि व्यक्ति चाहकर भी अपने काम को मन लगाकर नहीं कर पाता है। इसलिए मकड़ी के जालों को अशुभ माना जाता है।

ध्यान रखें

    समय देखने के लिए घड़ी ही एकमात्र साधन है। अपने घर या दफ्तर में बंद पड़ी घड़ियों को तुरंत हटा देना चाहिए। घड़ियों को हमेशा अच्छी हालत में रखें। बंद पड़ी घड़ी को मरम्मत करवाकर हमेशा चालू रखें।

    रसोई में पूजा स्थान बनाना शुभ नहीं होता है। जिस घर में रसोई के अंदर ही पूजा का स्थान होता है, उसमें रहने वाले गरम दिमाग के होते हैं। परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी शिकायत भी हो सकती है।

    रसोई और बाथरूम का साथ-साथ होना शुभ नहीं होता है। ऐसे घर में रहने वालों को जीवन काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे घर की कन्याओं के जीवन में अशांति रहती है।

Focus should be on enjoyment

एक क्रिकेटर को खेल खेलते समय अपनी सारी पहचान छोड़ देनी चाहिए। यदि क्रिकेट खिलाड़ी हरदम अपनी पहचान के अनुसार सोचें, तो खेलना बहुत बोझिल हो जाएगा। जैसे ही वह अपनी पहचान से पूर्ण रूप से मुक्त होता है, फिर उसे खेल खेलना नहीं पड़ता, वह बस होता है।

जब हम बच्चे थे हमने खेल खेले, सिर्फ इसलिए कि हम उनसे आनंदित हों। धीरे-धीरे, खेल पूंजी-निवेश के एक अवसर के रूप में विकसित हो गया। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट वर्ल्ड कप को ही लीजिए।

अफसोस, जैसे ही खिलाड़ी विश्वविजेता होने में अधिकाधिक लिप्त होते जाते हैं, वे खेल को भूलते जाते हैं। फिर खेल एक काम बन जाता है। खिलाड़ी जब सिर्फ खेल का आनंद लेते हैं, तभी वे अपना अव्वल प्रदर्शन कर सकते हैं। जीवन में भी ऐसा ही है।

जब हम तनाव को हावी होने देते हैं, समस्याओं को बड़ा बना लेते हैं तो हम अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाते हैं। अपनी योग्यता का ठीक प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

भारत के लिये खेलने का अर्थ है एक अरब लोगों की आशाओं को पूरा करना और यह आसान नहीं है। जब खिलाड़ी दूसरे लोगों की अपेक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए खेलना शुरू कर देते हैं, उनके मन पर दबाव बढ़ जाता है।

जब कोई व्यक्ति वास्तव में प्रसन्न् और बेफिक्र होता है, वह असाधारण शारीरिक कार्यों में हिस्सा ले सकता है। खेल के लिए योग का मुख्य पहलू यह है कि बिना किसी पूर्व विचार के कार्य का निष्पादन किया जा सकता है। विचार करने से इरादे स्पष्ट हो सकते हैं। तो, अच्छा खिलाड़ी सोचता नहीं है, इस क्षण में जो भी जरूरी है वह बस उसे करता है।

जब खिलाड़ी भरपूर अभ्यास करते हैं, तो उन्हें मैदान में जो भी है, उनके अंदर से सहज निकल आता है। फिर विपक्षी जो भी दांव खेलें, खिलाड़ी बहुत फुर्ती से उसका जवाब दे सकते हैं।योग के ठीक-ठीक अभ्यास से अपने मन और शरीर पर पूरा नियंत्रण रखते हुए, वे बिना किसी पूर्व विचार के सहज ही कार्य करना सीख सकते हैं।

ध्यान का अर्थ है, अपनी मूल प्रकृति में लौटना। जब आप इस सांस के साथ सहज होते हैं आपकी सारी अन्य पहचान मिट जाती हैं। विश्वविजेता के लिए ध्यान करना असंभव है। इसलिए एक क्रिकेट को खेल खेलते समय अपनी सारी पहचान छोड़ देनी चाहिए। यदि क्रिकेट खिलाड़ी हरदम अपनी पहचान के अनुसार सोचे, तो यह बहुत बोझिल हो जाएगा।

जैसे ही वह अपनी पहचान से पूर्ण रूप से मुक्तहोता है, फिर उसे खेल खेलना नहीं पड़ता, वह बस होता है। कोई व्यक्ति एक महान क्रिकेटर कैसे बन जाता है? इसलिए नहीं कि विरोधी दल में हुनर नहीं था। ऐसे खिलाड़ी को चीजों के बीच तालमेल बिठाना बहुत अच्छी तरह से आता है। वह जानता है कि उसे अपने जीवन में क्या चाहिए।

उस व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से जागरूक होना बहुत महत्त्वपूर्ण है। तब वह जो भी खेल खेलता है, वह बहुत अच्छी तरह से खेलता है।

जब मूर्ख लोग क्रिकेट खेलते हैं, क्रिकेट एक मूर्खतापूर्ण खेल बन जाता है। जब बुद्धिमान क्रिकेट खेलते हैं, यह चतुर खेल बन जाता है। यह सब इस पर निर्भर करता है कि खेल कौन खेल रहा है। खिलाड़ी अपने को तैयार कैसे करते हैं यह क्रिकेट से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

अपने अंदर कोई खास गुण लाए बिना वे खेल में गुणवत्ता नहीं ला सकते, वे खेल की गुणवत्ता को नहीं बढ़ा सकते। यदि वे अपने अंदर विनम्रता लाएं,ऐसी ऊंचाइयों को छुएगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

जो खिलाड़ी इस ऊंचाई को पा सके हैं उसके पीछे विनम्रता ही है। विनम्रता से ही वे योग्य बनते हैं। किसी खास स्थिति से जुड़ने और उसका बुद्धिमानी से उत्तर देने के लिए स्वीकृति भी महत्त्वपूर्ण है।

हम दूसरे दल और पक्ष को स्वीकार करें यह अधिक महत्त्वपूर्ण है। पूर्ण स्वीकृति में कोई विरोध शेष नहीं रहता। कोई खेल तभी खेला जा सकता है जब दूसरे ग्यारह खिलाड़ी मौजूद हों- सिर्फ तभी एक मैच संभव है।

स्वीकृति से कोई तनाव नहीं रहता। ऐसा करने पर दूसरे दल की काबिलियत और उनकी जीत के कीर्तिमान आपके लिए कोई समस्या नहीं रह जाते। यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है।

जिंदगी को भी खेल की तरह ही जीता जा सकता है और जिया जा सकता है। जो उर्जा को सही जगह खर्च करते हैं वे विजेता बनते हैं। उनके लिए कुछ भी कठिन नहीं रहता।