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Monday, 16 June 2014

Lord krishnas unique mandir

श्रीधाम वृंदावन में एक से एक बेजोड़ मंदिर हैं। इनकी शिल्पकला भी अनूठी है। लेकिन अब एक ऐसा मंदिर बन रहा है, जिसके शिल्प की कहानियां सुनाई जाएंगी।

वात्सल्य ग्राम में विश्व का अनूठा 'सर्वमंगला मंदिर' बन रहा है, जिसकी धातुओं से बनी तीन छतें बिना खंभों के होंगी। मंदिर 1.50 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला होगा। मंदिर का निर्माण मां साध्वी ऋतंभरा करा रही हैं।

उन्होंने इसका कार्य पूरा होने तक अन्ना त्याग रखा है। माना जा रहा है कि यह मंदिर कई मामलों में प्रेम मंदिर चंद्रोदय से भी भव्य होगा। मथुरा और वृंदावन के बीच स्थित वात्सल्य ग्राम में अनूठे 'सर्वमंगला मंदिर' को साकार रूप देने का कार्य बिना किसी घोषणा के छह माह पूर्व शुरू किया गया था।

मंदिर की तीन छतें दुनिया में अनूठी होंगी। यह तांबे, कांसे और पीतल से बनाई जाएंगी, जिनका भार किसी खंभे पर नहीं रहेगा।

So get rid of bad thoughts

किसी के घटना या व्यक्ति के साथ आपका कटु अनुभव आपके मूड को खराब कर सकता है। यह अचानक होता है और अगर आप इससे मुक्त नहीं होते तो यह लंबे समय के लिए आपके दिमाग को जकड सकता है।

इसका आप पर ज्यादा प्रभाव हो भी सकता है। अगर आप बुरे खयालों के बीच खुद को कैद कर देते हैं तो आपको उससे बाहर आने के लिए ज्यादा मेहनत करना पड़ सकती है।

आखिर कुछ लोग और घटनाएं आपको दुखी क्यों करती हैं यह जानकर आप उन बुरे विचारों से निकलने का प्रयास कर सकते हैं। कुछ छोटे उपायों पर अगर आप गौर करें तो बुरे मूड से बाहर आना कठिन नहीं है।

    जो व्यक्ति या स्थिति आपको अप्रिय लगती है उसे नकारात्मक ढंग से देखने के बजाय सकारात्मकता के साथ देखें।

    जो बात आपको बहुत ज्यादा परेशान कर रही है उससे अलग सोचने या कुछ नया करने का प्रयास करें।

    उन लोगों के साथ वक्त बिताए जो आपको अच्छा सोचने के लिए प्रेरित करते हों या जिनके साथ वक्त बिताना अच्छा लगता हो।

    एक्सरसाइज करें क्योंकि यह आपको किसी भी बुरे खयाल से निकलने में मदद करती है।

    सुस्त न रहें और कुछ न कुछ नया काम हाथ में लें। अगर आप सुस्त हो गए तो उदासी आप पर हावी हो जाएगी।

    कुछ पढ़ने के लिए समय निकालें। शुरुआत में पढ़ने में मन लगाना पड़ेगा लेकिन कुछ समय बाद आपको इसमें आनंद आने लगेगा।

    अपने मित्रों के साथ इस घटना को बांटें ताकि उसके बोझ से मुक्त हो सकें।

    कोई रोमांचक फिल्म देखने के साथ भी आप बुरे खयालों से मुक्ति पा सकते हैं।

    लेखन, गायन या पेंटिंग में अगर आपकी रुचि है तो उसमें अपना समय लगाएं।

    अगर किसी बंद जगह या किसी कमरे में हैं तो वहां से बाहर निकलें।

    कोई नई डिश या नए व्यंजन को आजमाएं। किसी नई जगह जाकर कुछ वक्त बिताएं।

    किसी भी पेंडिंग काम को पूरा करने के लिए निकल पड़ें। चाहे यह बगीचे की सफाई हो या फिर मोटरबाइक की सर्विसिंग।

Try these 6 tips that will solve your problems

समस्याओं से मनुष्य कभी नहीं बच सकता। किसी न किसी समस्या के फेर में पड़ा रहता है। आज का मनुष्य! गृहस्थी के चलता है। नौकरी और व्यवसाय को करता है।

रोगों से लड़ता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है। इसमें कई तरह की समस्याएं आती हैं। इस प्रकार की अनेक समस्याएं व्यक्ति के जीवन में आती-जाती रहती हैं। यकीन कीजिए आप इन सभी तरह की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

    विशाखा नक्षत्र में महुआ का बांदा लाकर गले में धारण करने से भय समाप्त हो जाता है। डरावने सपने नहीं आते।

    मघा नक्षत्र में हरसिंगार का बांदा लाकर घर में रखने से समृद्धि एवं संपन्नता में वृद्धि होती है।

    घर में रखने वाली अलमारी का मुख उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलक्ष्मी का आगमन घर में होता है।

    यदि मकान बनाते समय वास्तु यंत्र की स्थापना भूमि पूजन के साथ कर दी जाए तो मकान पर बुरी आत्माओं का साया नहीं रहता।

    जो बच्चा सोने के नाम से ही डर जाता हो, उसकी चारपाई के नीचे तवे को उल्टा करके रख दें। बच्चा आसानी से सो जाएगा।

    यदि आप पर परिवार की अधिक जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें आप धन की कमी के कारण पूरा नहीं कर पा रहें हैं तो आप महीने के पहले शुक्रवार को एक लाल कमल का फूल लाकर उस पर रोली से तिलक कर, लाल वस्त्र के ऊपर रखें और धूप-दीप दिखाकर, उसी लाल वस्त्र में लपेटकर धन रखने के स्थान पर रख दें।

Wednesday, 11 June 2014

When spider webs in the home might increase may take the trouble

वास्तु दोष के कारण कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। घर का मुख्य द्वार वास्तु दोषों से मुक्त हो, तो घर में सुख-समृद्धि रहती है। सभी तरह के मंगल कार्यों में वृद्धि होती है और परिवार के लोगों में आपसी समंजस्य बना रहता है।

वास्‍तु के अनुसार मकड़ी के जाले घर में बहुत अशुभ माने जाते हैं। अमूमन देखा जाता है घर के निचले हिस्सों की तो सफाई हो जाती है लेकिन छत या ऊपरी हिस्सों की ठीक से सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में वहां मकड़ी द्वारा जाले बना लिए जाते हैं। घर में ये जाले होना अशुभ माना जाता है।

लोग कहते हैं कि घर में मकड़ी के जाले नहीं होना चाहिए। ये अशुभ होते हैं। ये अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक कारण मौजूद हैं। मकड़ी के जालों की संरचना कुछ ऐसी होती है कि उसमें नकारात्मक ऊर्जा एकत्रित हो जाती है। इसलिए घर के आनजिस भी कोने में मकड़ी के जाले होते हैं, वह कोना या हिस्सा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इस कारण घर में कलह, बीमारियां व अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

मकड़ी के एक जाले में असंख्य सूक्ष्मजीव रहते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पंहुचाते हैं। इसलिए कहा जाता हैं कि अगर घर में मकड़ी के जाले होते हैं तो घर की सुख-समृद्धि का नाश होने लगता है क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा के कारण घर का माहौल इतना अशांत हो जाता है कि व्यक्ति चाहकर भी अपने काम को मन लगाकर नहीं कर पाता है। इसलिए मकड़ी के जालों को अशुभ माना जाता है।

ध्यान रखें

    समय देखने के लिए घड़ी ही एकमात्र साधन है। अपने घर या दफ्तर में बंद पड़ी घड़ियों को तुरंत हटा देना चाहिए। घड़ियों को हमेशा अच्छी हालत में रखें। बंद पड़ी घड़ी को मरम्मत करवाकर हमेशा चालू रखें।

    रसोई में पूजा स्थान बनाना शुभ नहीं होता है। जिस घर में रसोई के अंदर ही पूजा का स्थान होता है, उसमें रहने वाले गरम दिमाग के होते हैं। परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी शिकायत भी हो सकती है।

    रसोई और बाथरूम का साथ-साथ होना शुभ नहीं होता है। ऐसे घर में रहने वालों को जीवन काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे घर की कन्याओं के जीवन में अशांति रहती है।

Focus should be on enjoyment

एक क्रिकेटर को खेल खेलते समय अपनी सारी पहचान छोड़ देनी चाहिए। यदि क्रिकेट खिलाड़ी हरदम अपनी पहचान के अनुसार सोचें, तो खेलना बहुत बोझिल हो जाएगा। जैसे ही वह अपनी पहचान से पूर्ण रूप से मुक्त होता है, फिर उसे खेल खेलना नहीं पड़ता, वह बस होता है।

जब हम बच्चे थे हमने खेल खेले, सिर्फ इसलिए कि हम उनसे आनंदित हों। धीरे-धीरे, खेल पूंजी-निवेश के एक अवसर के रूप में विकसित हो गया। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट वर्ल्ड कप को ही लीजिए।

अफसोस, जैसे ही खिलाड़ी विश्वविजेता होने में अधिकाधिक लिप्त होते जाते हैं, वे खेल को भूलते जाते हैं। फिर खेल एक काम बन जाता है। खिलाड़ी जब सिर्फ खेल का आनंद लेते हैं, तभी वे अपना अव्वल प्रदर्शन कर सकते हैं। जीवन में भी ऐसा ही है।

जब हम तनाव को हावी होने देते हैं, समस्याओं को बड़ा बना लेते हैं तो हम अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाते हैं। अपनी योग्यता का ठीक प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

भारत के लिये खेलने का अर्थ है एक अरब लोगों की आशाओं को पूरा करना और यह आसान नहीं है। जब खिलाड़ी दूसरे लोगों की अपेक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए खेलना शुरू कर देते हैं, उनके मन पर दबाव बढ़ जाता है।

जब कोई व्यक्ति वास्तव में प्रसन्न् और बेफिक्र होता है, वह असाधारण शारीरिक कार्यों में हिस्सा ले सकता है। खेल के लिए योग का मुख्य पहलू यह है कि बिना किसी पूर्व विचार के कार्य का निष्पादन किया जा सकता है। विचार करने से इरादे स्पष्ट हो सकते हैं। तो, अच्छा खिलाड़ी सोचता नहीं है, इस क्षण में जो भी जरूरी है वह बस उसे करता है।

जब खिलाड़ी भरपूर अभ्यास करते हैं, तो उन्हें मैदान में जो भी है, उनके अंदर से सहज निकल आता है। फिर विपक्षी जो भी दांव खेलें, खिलाड़ी बहुत फुर्ती से उसका जवाब दे सकते हैं।योग के ठीक-ठीक अभ्यास से अपने मन और शरीर पर पूरा नियंत्रण रखते हुए, वे बिना किसी पूर्व विचार के सहज ही कार्य करना सीख सकते हैं।

ध्यान का अर्थ है, अपनी मूल प्रकृति में लौटना। जब आप इस सांस के साथ सहज होते हैं आपकी सारी अन्य पहचान मिट जाती हैं। विश्वविजेता के लिए ध्यान करना असंभव है। इसलिए एक क्रिकेट को खेल खेलते समय अपनी सारी पहचान छोड़ देनी चाहिए। यदि क्रिकेट खिलाड़ी हरदम अपनी पहचान के अनुसार सोचे, तो यह बहुत बोझिल हो जाएगा।

जैसे ही वह अपनी पहचान से पूर्ण रूप से मुक्तहोता है, फिर उसे खेल खेलना नहीं पड़ता, वह बस होता है। कोई व्यक्ति एक महान क्रिकेटर कैसे बन जाता है? इसलिए नहीं कि विरोधी दल में हुनर नहीं था। ऐसे खिलाड़ी को चीजों के बीच तालमेल बिठाना बहुत अच्छी तरह से आता है। वह जानता है कि उसे अपने जीवन में क्या चाहिए।

उस व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से जागरूक होना बहुत महत्त्वपूर्ण है। तब वह जो भी खेल खेलता है, वह बहुत अच्छी तरह से खेलता है।

जब मूर्ख लोग क्रिकेट खेलते हैं, क्रिकेट एक मूर्खतापूर्ण खेल बन जाता है। जब बुद्धिमान क्रिकेट खेलते हैं, यह चतुर खेल बन जाता है। यह सब इस पर निर्भर करता है कि खेल कौन खेल रहा है। खिलाड़ी अपने को तैयार कैसे करते हैं यह क्रिकेट से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

अपने अंदर कोई खास गुण लाए बिना वे खेल में गुणवत्ता नहीं ला सकते, वे खेल की गुणवत्ता को नहीं बढ़ा सकते। यदि वे अपने अंदर विनम्रता लाएं,ऐसी ऊंचाइयों को छुएगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

जो खिलाड़ी इस ऊंचाई को पा सके हैं उसके पीछे विनम्रता ही है। विनम्रता से ही वे योग्य बनते हैं। किसी खास स्थिति से जुड़ने और उसका बुद्धिमानी से उत्तर देने के लिए स्वीकृति भी महत्त्वपूर्ण है।

हम दूसरे दल और पक्ष को स्वीकार करें यह अधिक महत्त्वपूर्ण है। पूर्ण स्वीकृति में कोई विरोध शेष नहीं रहता। कोई खेल तभी खेला जा सकता है जब दूसरे ग्यारह खिलाड़ी मौजूद हों- सिर्फ तभी एक मैच संभव है।

स्वीकृति से कोई तनाव नहीं रहता। ऐसा करने पर दूसरे दल की काबिलियत और उनकी जीत के कीर्तिमान आपके लिए कोई समस्या नहीं रह जाते। यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है।

जिंदगी को भी खेल की तरह ही जीता जा सकता है और जिया जा सकता है। जो उर्जा को सही जगह खर्च करते हैं वे विजेता बनते हैं। उनके लिए कुछ भी कठिन नहीं रहता।

Store room of house according to vastu

भवन निर्माण में भंडार गृह या भंडारण कक्ष (स्टोर रूम) मुख्य योजना का एक अहम हिस्सा रहता है। भंडार गृह बनाने के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं कि वर्षभर के लिए अन्न का भंडारण किया जा सके और जरूरी वस्तुओं का संचय भी हो सके।

यदि आपके पास पर्याप्त जगह है तो अन्न के भंडारण और अन्य वस्तुओं के संचय के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए जाने चाहिए लेकिन अगर जगह का अभाव है तो एक ही कक्ष से दोनों उपयोग लिए जा सकते हैं। यहां भंडार गृह संबंधी प्रमुख वास्तु सुझाव दिए जा रहे हैं जो पारिवारिक समृद्धता को संभव बनाते हैं।

भंडार गृह में न रखें अनुपयोगी चीजें

    अन्नादि के भंडार कक्ष का द्वार नैर्ऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में होना चाहिए।

    अगर वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में अन्ना कक्ष या अन्न भंडार गृह बनाया जाता है तो अन्न की कभी कमी नहीं होती है। घर में धन-धान्य बना रहता है।

    अन्न का वार्षिक संग्रहण दक्षिणी अथवा पश्चिमी दीवार के समीप किया जाना चाहिए।

    अन्न कक्ष या अन्ना भंडार गृह में डिब्बे या कनस्तर को खाली नहीं रहने दें। अगर कोई डिब्बा पूरी तरह खाली हो रहा हो तो भी उसमें कुछ मात्रा में अन्न बचा देना चाहिए। यह समृद्धि के लिए जरूरी माना जाता है।

    अन्न भंडार कक्ष में घी, तेल, मिट्टी का तेल एवं गैस सिलेन्डर आदि को आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखना चाहिए।

    अन्न के भंडार कक्ष में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में शुद्ध और पवित्र जल से भरा हुआ मिट्टी का एक पात्र रखा जाना चाहिए। इस बात का खयाल रखें कि यह पात्र खाली न हो।

    अन्न कक्ष में अगर विष्णु और लक्ष्मी का चित्र या प्रतिमा हो तो उससे समृद्धि प्राप्त होती है।

    रोज उपयोग में आने वाले खाद्यान्न को कक्ष के उत्तर-पश्चिमी भाग में रखा जाना चाहिए।

    पूर्व दिशा में अगर भंडार गृह हो तो घर के मुखिया को अपनी आजीविका के लिए ज्यादा यात्रा करनी पड़ती है। वह अक्सर घर से बाहर ही रहता है।

    आग्नेय कोण में अगर भंडार कक्ष का निर्माण किया जाए तो मुखिया की आमदनी हमेशा कम ही पड़ती है।

    दक्षिण दिशा में भंडार कक्ष बनाने पर घर के सदस्यों के बीच आपसी मतभेद हो सकते हैं। इस तरह के भंडार कक्ष से घर में अशांति बनी रहती है।

    संयुक्त भंडार कक्ष भवन के पश्चिमी अथवा उत्तर-पश्चिमी भाग में बनाया जाना चाहिए।

    संयुक्त भंडार गृह में अन्ना वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में रखा जाना चाहिए।

    अगर संयुक्त रूप से भंडार कक्ष का उपयोग किया जाता है तो उसमें ऐसी चीजें नहीं रखना चाहिए जो हमारे लिए पूरी तरह अनुपयोगी हैं।

    संयुक्त भंडार गृह में अन्य चीजों का भंडारण दक्षिणी और पश्चिमी दीवार की ओर किया जाना चाहिए।

    संयुक्त भंडारगृह के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जल का पात्र रखना शुभकर रहता है और परिवार में शांति और समृद्धि में वृद्धि करता है।

Understand the pain and sorrow of others

एक ज्ञानी संत थे। दूसरों के दुख दूर करने में उन्हें परम आनंद प्राप्त होता था। एक बार वे सरोवर के किनारे ध्यान में बैठे हुए थे। तभी उन्होंने देखा एक बिच्छु पानी में डूब रहा है। वे तुरंत ही उसे बचाने के लिए दौड़ पड़े।

उन्होंने जैसे ही बिच्छु को पानी से निकालने के लिए उठाया उसने स्वामीजी को डंक मारना शुरू कर दिया और वह संत के हाथों से छुटकर पुन: पानी में गिर गया। स्वामीजी ने फिर कोशिश परंतु वे जैसे ही उसे उठाते बिच्छु डंक मारने लगता।

ऐसा बहुत देर तक चलता रहा, परंतु संत ने भी हार नहीं मानी और अंतत: उन्होंने बिच्छु के प्राण बचा लिए और उसे पानी से बाहर निकाल लिया। वहीं एक अन्य व्यक्ति इस पूरी घटना को ध्यान से देख रहा था। जब संत सरोवर से बाहर आए तब उस व्यक्ति ने पूछा- स्वामीजी मैंने देखा आपने किस तरह जहरीले बिच्छु के प्राण बचाए।

बिच्छु को बचाने के लिए अपने प्राण खतरे में डाल दिए। जब वह बार-बार डंक मार रहा था तो फिर आपने उसे क्यों बचाया? इस प्रश्न को सुनकर स्वामीजी मुस्काए और फिर बोले- बिच्छु का स्वभाव है डंक मारना और मनुष्य का स्वभाव है दूसरों की मदद करना।

संक्षेप

जब बिच्छु नासमझ जीव होते हुए भी अपना डंक मारने का स्वभाव अंत समय तक नहीं छोड़ रहा है तो मैं मनुष्य होते हुए दूसरों की मदद करने का मेरा स्वभाव कैसे छोड़ देता।

बिच्छु के डंक मारने से मुझे पीड़ा हो रही है परंतु उसकी जान बचाकर मुझे जो परम आनंद प्राप्त हुआ उससे मैं बहुत खुश हूं।